हनुमान जयंती
संकटमोचन, पवनपुत्र श्री हनुमान जी के प्राकट्य दिवस का पावन उत्सव।
हनुमान जयंती
पौराणिक कथा (Story)
चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को पवनपुत्र, शिव के रुद्रावतार श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। माता अंजना और केसरी नंदन हनुमान जी ने बाल्यकाल में ही सूर्य देव को फल समझकर मुख में ले लिया था। वे प्रभु श्री राम के सबसे अनन्य और निष्काम भक्त हैं।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति के दाता हैं। हनुमान जयंती पर उनकी पूजा-अर्चना करने से भूत-पिशाच, भय और शनि दोषों से मुक्ति मिलती है तथा आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में हनुमान जी को चोला (सिंदूर और चमेली का तेल), लाल लंगोट, जनेऊ, पान का बीड़ा और बूंदी के लड्डू अर्पित किए जाते हैं। सुंदरकांड, बजरंग बाण और हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ किया जाता है।