करवा चौथ
सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला निर्जला व्रत।
करवा चौथ
पौराणिक कथा (Story)
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा जाता है। पतिव्रता वीरावती और करवा देवी की तपस्या की कथाएं इस पर्व की महिमा दर्शाती हैं, जिनके तपोबल से यमराज को भी उनके पतियों के प्राण लौटाने पड़े थे।
आध्यात्मिक महत्व (Importance)
यह व्रत दांपत्य जीवन में मधुरता, प्रेम और विश्वास को दृढ़ करता है। माता गौरी और भगवान शिव की कृपा से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।
पूजा विधि एवं उत्सव (Celebration & Rituals)
महिलाएं सोलह श्रृंगार कर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को करवा माता की कथा सुनती हैं और रात को चंद्र दर्शन के बाद छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।